6

4

H

T

रक्षाबंधन

🌸 *खरे रक्षाबंधन*🌸

इवल्या इवल्या हाताने माझ्या राखी तुला बांधेल !!

दादा दादा म्हणत तुझ्या मागे मी फिरेन !!

गोड गोड खाऊ मी माझ्या हाताने तुला भरवेन !!

आपल्या या नात्याला नव आयुष्य लाभेल !!

या साठी दादा मला येऊ दे !!

आई ला तू सांग ना मला जग पाहू दे !!

केवळ परंपरेचा भाग म्हणून रक्षाबंधन साजरे करू नका !!

तुमच्या मूलांच्या बहिणींना गर्भातच मारू नका !!

कला सुसंगत परंपरांना आमचे नेहमीच वंदन आहे !!

गर्भातल्या लेकी-बहिणी वाचवणे हेच आमचे *खरे रक्षाबंधन* आहे !! 

      ………👫…….

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Ele.works 



Me & my teem any time ready for all types electrical works.   pl call Aabhoj Electrical Services 09822467970  vishwanath Kumbhalkar

Lainman

लाईट की कीमत और

*बीजली वाले लाईन मेन की  हिम्मत*

कभी कम नहीं हो …सकती
दिल तो आशिक तोडते है साहब…….
हम तो उजालो के रखवाले हैं… रिकॉर्ड तोडते हैं
अंजाम की फिक्र 

तो कायरों को होती है,   
हम तो *power house*वाले है, 👈

जहाँ *_Risk_* होती है, वहाँ हमारी *_Entry Fix_*  होती है..

 😞😞😞😞😞😞
*कैसे सोती होगी वो हर माँ*

_जिसे पता है की लाईन पर उसका बेटा खड़ा हैं 😥_
*कैसे कमाता होगा वो हर पिता*

_जिसका बेटा बारिश के तुफानो मे लोगो के घर के उजालो के लीऐ मौत से लड रहा है. 😔_
*केसे चहकती होगी वो हर बहन*

_जिसके भाई का इंतजार हेवी पावर की लाईन कर रही हैं 😔_
*कैसे काम करता होगा वो हर भाई*

_जो उसके आने का इंतजार कर रहा हो😔_
*कैसे जीती होगी वो नारी*

_जिसका सिंदूर कभी भी मिट सकता हे😔_
*कैसे रहते होंगे वो हर दोस्त*

_जिनका यार कभी भी 108 मे आ सकता हैं…….😥_

एक बिजली वाला✍🏽✍🏽

अच्छा लगे तो आगे भेजे *
😞😞😞😞😞😞😞😞😞

  All Technician

एक एसडीएम की कहानी —->> 

प्लीज पूरी पढ़े ओर शेयर करे
आज स्कूल में शहर की LADY SDM आने वाली थी क्लास की सारी लड़कियां ख़ुशी के मारे फूले नहीं समां रही थी …सबकी बातों में सिर्फ एक ही बात थी SDM .. और हो भी क्यों न आखिर वो भी एक लड़की थी ….पर एक ओर जब सब लड़कियां व्यस्त थी SDM की चर्चाओं में ….एक लड़की सीट की लास्ट बेंच पर बैठी पेन और उसके कैप से खेल रही थी …उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था कौन आ रहा है और क्यों आ रहा है ? .वो अपने में मस्त थी ….वो लड़की थी आरुषि …!!! आरुषि पास के ही एक गांव के एक किसान की एकलौती बेटी थी …..स्कूल और उसके घर का फासला लगभग 10 किलोमीटर का था जिसे वो साइकिल से तय करती थी …..स्कूल में बाकि की सहेलियां उससे इसलिए ज्यादा नहीं जुड़कर रहती थी क्योंकि वो उनकी तरह रईस नहीं थी लेकिन इसमें उसका क्या दोष था …?…… खैर उसकी जिंदगी सेट कर दी गयी थी इंटरमीडिएट के बाद उसे आगे नहीं पढ़ा सकते थे ….क्योंकि उसके पापा पैसा सिर्फ एक जगह लगा सकते थे या शादी में और या तो आगे की पढाई में ….उसके परिवार में कोई भी मैट्रिक से ज्यादा पढ़ा नहीं था …. बस यही रोड मैप उसके आँखों के सामने हमेशा घूमता रहता कि ये क्लास उसकी अंतिम क्लास है और इसके बाद उसकी शादी कर दी जाएगी …..इसीलिए वो आगे सपने ही नहीं देखती थी और इसीलिए उस दिन एसडीएम के आने का उसपर कोई फर्क नहीं पड़ा ……ठीक 12 बजे SDM उनके स्कूल में आयी …. यही कोई 24 -25 की साल की लड़की ..नीली बत्ती की अम्बेसडर गाड़ी और साथ में 4 पुलिसवाले …..2 घंटे के कार्यक्रम के बाद एसडीएम चली गयी ….लेकिन आरुषि के दिल में बहुत बड़ी उम्मीद छोड़कर गयी …उसे अपनी जिंदगी से अब प्यार हो रहा था …..जैसे उसके सपने अब आज़ाद होना चाहते हो …!! 

उस रात आरुषि सो नहीं पायी ….स्कूल में भी उसी उलझन में लगी रही ….क्या करूँ ? …. वो अब उड़ना चाहती थी फिर अचानक पापा की गरीबी उसके सपनो और मंजिलो के बीच में आकर खड़ी हो जाती ……वो घर वापस गयी और रात खाने के वक़्त सब माँ और पापा को बता डाला ……पापा ने उसे गले से लगा लिया ….उनके पास छोटी सी जमीन का एक टुकड़ा था …कीमत यही 50000 रुपये की होगी …..आरुषि की शादी के लिए उसे डाल रखा था …..पापा ने कहा की मैं सिर्फ एक ही चीज पूरी कर सकता हूँ .. .. तेरी शादी के लिए हो या तेरे सपने ……आरुषि अपने सपनों पर दांव खेलने को तैयार हो गयी ……. इंटरमीडिएट के बाद उसके बीए में दाखिला लिया …क्योंकि ग्रेजुएशन में इसकी फीस सबसे सस्ती थी …. पैसे का इंतेजाम पापा ने किसी से मांग कर कर दिया …. पर ये उसकी मंजिल नहीं थी उसकी मंजिल तो कही और थी ….उसने तैयारी शुरू की …..सबसे बड़ी समस्या आती किताबों की …. तो उसके लिए नुक्कड़ की एक पुरानी दुकान का सहारा लिया ..जहाँ पुरानी किताबे बेचीं या खरीदी जाती थी ..ये पुरानी किताबें उसे आधी कीमत में मिल जाती थी …वो एक किताब खरीदकर लाती और पढ़ने के बाद उसे बेचकर दूसरी किताब …..”” कहते हैं न कि जब परिंदों के हौसलों में शिद्दत होती है तो आसमान भी अपना कद झुकाने लगता है “” ….आरुषि की लगन को देखकर उस दुकान वाले अंकल ने उसे किताबे फ्री में देनी शुरू की और कुछ किताबें तो खुद नयी खरीदकर दे देते और कहते कि बिटिया जब बन जाना तो सूद समेत वापस कर देना “” कुछ भी हो आरुषि इस यकीन को नहीं तोडना चाहती थी ….. ग्रेजुएशन के 2 साल पूरे हो गए …..और उसकी तैयारी लगातार चलती रही ….. सब ठीक चल रहा था कि अचानक उसके माँ की तबियत ख़राब हो गयी ….इलाज के लिए पैसे की जरुरत थी लेकिन पहले से की घर क़र्ज़ में डूब चूका था …..अंत में पापा ने जमीन गिरवी रख दी …. और इसी बीच उसने ग्रेजुएशन के तीसरे वर्ष में दाखिला लिया …. समस्याएं दामन नहीं छोड़ रही थी …. आरुषि कब तक अपने हौसलो को मजबूत बनाने की कोशिस करती आख़िरकार एक दिन मां से लिपटकर वो बहुत रोई ..और एक ही बात पूछी “”” मां हमारे कभी अच्छे दिन नहीं आएंगे ? .””” . …. मां ने उसे साहस दिया ..और फिर से उसने कोशिस की ..!! ..कहते हैं न कि योद्धा कभी पराजित नहीं होते …या तो विजयी होते हैं और या तो वीरगति को प्राप्त होते हैं ……..!! ….23 जून हाँ ये वही दिन था जब आरुषि ने प्रारंभिक परीक्षा पास की थी ..अब बारी मुख्य परीक्षा की थी .और आरुषि के हौसले अब सातवें आसमान को छू रहे थे …… तीन वर्ष की लगातार कठिन परिश्रम का फल था की आरुषि ने मुख्य परीक्षा भी पास कर ली ……..अब वो अपने सपने से सिर्फ एक कदम दूर खड़ी थी …… पीछे मुड़कर देखती तो उसे सिर्फ तीन लोग ही नजर आते ..माँ , पापा और दुकान वाले अंकल ……आख़िरकार इंटरव्यू हुआ …..और अंतिम परिणाम में आरुषि ने सफलता हासिल की ….आरुषि को जैसे यकीन नहीं हो रहा था की हाँ ये वही आरुषि है ….. माँ , पापा तो अपने आंसुओं के सैलाब को रोक नहीं पा रहे थे …. आरुषि अपने घर से तेजी से निकल गयी … उन्ही आंसुओं के साथ आखिर किसी और को भी तो उसे धन्यवाद देना था ….सीधे जाकर दुकान वाले अंकल के पास रुकी …..अंकल ने उसे गले से लगा लिया और खुद भी छलक गए !!

असल में ये जीत सिर्फ आरुषि की जीत नहीं थी .इस जीत में शामिल थी माँ की ममता ..पिता के हौसले और दुकान वाले अंकल का यकीन ..!!

▪▪पंतप्रधानाना खुले पत्र …▪▪

.

आदरणीय श्री. नरेंद्र मोदी जी,

.

.

.

● आमची लायकी नाही तुमच्या सारखा…

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

चांगला पंतप्रधान पहाण्याची.

●देशातील बहुसंख्य लोकांना तुमच्या कामाची कदर नाही.

●तुम्ही सोळा सोळा तास काम करता,

●रात्री विमान प्रवास करुन दुसऱ्या देशांना दिवसा भेट देऊन वेळ वाचवता,

●पण तुमच्या या बलिदानाची स्तुती हे भित्रे आणि मनोरुग्ण लोक कधीच करणार नाहीत.

●हे लोक ६० वर्ष एका कुटुंबाकडे देश सोपवतात….

●पण तुम्हाला पाच वर्ष शांततेने काम करुन देणार नाहीत.

●हा देश खोटी देशभक्ती,पैसा, प्रसिद्ध आणि आळशी वृत्ती असलेल्या लोकांचा आहे.

●यांची अशी अपेक्षा आहे की या देशाने आम्हाला सगळं दिलं पाहिजे….

●पण मी देशासाठी काहीच करणार नाही.

●मला पाणी २४ तास पाहिजे पण मी एकपण वृक्ष लावणार नाही.

●आणि ते काम तुम्हीच केल पाहिजे अशी अपेक्षा ठेवणार.

●यांना आपलं चार माणसांचं कुटुंब चालवता येत नाही…. 

●पण देश कसा चालवायचा ते मात्र तुम्हास बरोबर सांगतील.

■■■■ वा !!!!!!!!!!!

● हि गोतावळ तुमचा बदला घ्यायला बघते आहे…..

●जसा काय तुम्ही पंतप्रधान बनुन जगातला सर्वात मोठा गुन्हा केलाय.

●यांना घरवापसी नको आणि धर्मपरिवर्तन बंदी कायदा पण नको.

●दादरी कांडात ह्यांची रांग लागली पण देशासाठी बलिदान देणाऱ्या संतोष महाडीक कडे कोणीच आलं नाही.

● गोवंश हत्या बंदी कायदा असताना उघडपणे गोमांसाच्या पार्ट्या होतात. हेच लोक अहिंसेसाठी निदर्शने करतात 

● अतिरेकी फाशी ला विरोध देशद्रोही कन्हय्या याला खरे बलीदांन विसरुन समर्थन केले जाते. 

● तुमच्या नावाचा उल्लेख करुन तुमचा अपमान करतात. 

● असहिष्णूता म्हणून पुरस्कार परत करतात.

● पण निर्भया हत्याकांड, २६/११ स्फोट यांसारखे प्रसंग दिसत नाहीत. 

● आता जनताच अशी आहे तर त्यांचे प्रतिनिधीत्व करणारे कसे असणार.

● तुम्ही देशासाठी येवढं काम करता आणि तेच लोकं तुम्हाला देशभक्ती शिकवतात.

मह्तआश्चर्यम ….!!!!!

● सत्यपरिस्थीती अशी आहे की तुम्ही पंतप्रधान झाले आहात हे या लोकाना सहन होत नाही. 

● ज्यांची अपेक्षा असते की माझ्या घरासमोरचा कचरा मनपाने उचलावा पण मी हात लावणार नाही…..

● त्यांची बोंबाबोंब एवढी आहे की सगळा देश जसा काय सर्वनाशाकडे चाललाय. 

● हे सगळे एक वस्तुस्थीती स्विकारत नाहीत की देश बळकट होतोय, देश प्रगती करतोय…..

पण नाही…….

● यांना तुरडाळ १ रुं किलो, कांदे फुकट पाहिजेत. 

● तुम्ही भ्रष्टाचार बंद करणार आणि या लोकांना असे सकारात्मक बदल नको आहेत.

● लोकांना फुकट खायची सवय लागली आहे.

आपला इतिहास साक्ष आहे….

● कोणी स्वताला बदलवणार नाही पण देश बदलला पाहिजे हे नक्की वाटणार. 

● ५० हजाराचा स्मार्टफोन वापरणार….. 

● 3G, 4G पॅकेज वापरणार….

● आणि बोलणार ” काय मोदी सरकारमधे काही खरं नाही. किती महागाई आहे”.

● २९७ रुपयाचा 3G पॅकेज लागतो आणि तुरडाळ, कांदा फुकट पाहिजे. 

● रस्त्यावर पान खाऊन थुकणारा, सार्वजनिक नळावर पाणी फुकट घालवणारा, नेहमी सिग्नल तोडणारा विचारतो अच्छे दिन कधी येणार ?

●●● अशी आपली जनता साहेब.●●●

● तुम्ही जगातल्या १० नामवंत आणि प्रातिभावान व्यक्तीमधे समाविष्ट आहात पण यांना त्याच काही नाही पडल. 

● तुम्ही या वयात आराम करायला पाहिजे तर तुम्ही १६ तास काम करता आणि तरुणांनी काम करायला पाहिजे तर ते आराम करुन देश बदलण्याची कल्पना करतात. 

● तुमच्या कामाची त्यागाची ईथे काही किंमत नाही. 

● तुम्ही जगाचं नेतृत्व कराल असं तुमचं व्यक्तीमत्व आहे,

● पण या देशातील जनतेला त्याची किंमत नाही.

● मला मोदीजींबद्द्ल आदर होता, आहे, आणि राहणार….

● काहींना ते पटणार नाही.

● पण मला त्याचे वावगे नाही.

● वैचारीक दरिद्री का श्रीमंती हे काळच ठरवेल.

●▪■○• दुर्दैव, निम्मे लोक हे फोरवर्ड देखील करणार नाहीत.

वादसवित्रीच्या हार्दिक शुभेच्छा