Monthly Archives: December 2013

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एक गांव के कुएं में गिर कर एक कुत्ता मर गया। लोगों ने जब कुएं में मरा कुत्ता देखा तो उसके जल को अपवित्र समझ उसका उपयोग करना छोड़ दिया और कुएं के जल को पवित्र करने के लिए बड़े-बड़े विद्वानों से उपाय पूछा। विद्वानों ने कई प्रकार के पूजा-पाठ व जाप के द्वारा उसके पवित्रीकरण का उपाय करने के लिए कहा और ग्रामीणों ने पूरी श्रद्धा से उन उपायों को सम्पादित किया। किन्तु सब कुछ करने के बावजूद कुएं के जल में बदबू आती रही तो सभी लोग उन प्रकाण्ड विद्वानों को दोष देते हुए उनके घर पर पहुंचे। विद्वानों ने कहा ऐसा हो ही नहीं सकता। तुम लोगों को हमारे किसी विरोधी ने बहकाया है कि हमारे उपाय सही नहीं है। चलो चल कर देखते हैं।
जब वे विद्वान कुएं के पास पहुँचे तो यह देख कर दंग रह गए कि कुएं में वह मरा कुत्ता पूर्ववत पड़ा हुआ है। विद्वानों ने ग्रामीणों की मूर्खता को कोसते हुए समझाया कि नादानों, इन उपायों को चाहे तुम हजार बार दुहराओ किन्तु जब तक कुएं से मरे हुए कुत्ते को बाहर नहीं फेंकोगे और उसका जल पूरी तरह उलीच नहीं डालोगे तब तक कुंए का जल पवित्र नहीं हो सकता। उपायों का अवलम्बन तो बाद में कामयाब होता है। तुम्हारा पहला कार्य तो मरे हुए कुत्ते को निकालना और पानी को उलीचना है।
मित्रो! कष्टों के निवारण के लिए भगवान की अनुकम्पा हासिल करने के लिए चाहे कोई भी उपाय उपयोग में लाया जाए उसके पहले उन बुनियादी त्रिसूत्री ब्रह्मास्त्र उपायों को अपनाना आवश्यक है। क्योंकि इसको अपनाए बिना कोई भी उपाय आपको मनोवांछित फल प्रदान नहीं करेगा।
ये उपाय हैं –
1. माँ-बाप की सेवा करें।
2. पति-पत्नी दोनों ही धर्मानुकूल आचरण करें।
3. राष्ट्र के प्रति वफादार रहें। राष्ट्र के साथ दगा न करें।
मुझे विश्वास है कि यदि आप मेरे इन बातों को मद्देनजर रखते हुए ही भगवान की अनुकंपा पाने के लिए शास्त्रोक्त उपाय करेंगे तो आपको अवश्य ही लाभ होगा और यदि ऐसा नहीं करते हैं तो चाहे कितने ही उपाय कर लीजिए वे फलिभूत नहीं होंगे फिर भगवान को दोष देने से कोई फायदा नहीं।

“अहले सुखन कि रह गए अपनी रगों में क़ैद
ग़ालिब के बाद आँख से टपका लहू कहाँ”
– भारत भूषण पन्त
शायरी के हम जैसे छोटे किसान जहाँ से फसल काट रहे हैं, उसके सब से बड़े ज़मींदार, उर्दू शायरी के सबसे यशस्वी सूर्य मिर्ज़ा ग़ालिब को उनके जन्मदिवस पर सदर प्रणाम!

Dr. PravinBhai Togadia
हिन्दू न्यूज नेटवर्क: अमरीका – भारत छोडो ! विश्व हिन्दू परिषद् का अमरीकी उत्पादनों और सेवाओं का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रीति से बहिष्कार करने का आवाहन। अमरिका : भारत छोडो! अमरिकी उत्पादनों का बहिष्कार ! यह पोस्ट पूर्ण पढ़ें : भारत की कन्या देवयानी खोब्रागडे (जो अमरिका में भारत की राजनयिक भी है ) वे अपनी छोटी बच्ची को शाला में छोड़ने गयी थी तब उन्हें न्यू यॉर्क की कड़ाके की ठण्ड में पोलिस ने गिरफ्तार किया , उन के कपडे उतरवाए और उन के शरीर को अनेक जगह स्पर्श कर उन की तलाशी ली गयी। उन्हें नशेड़ियों और खुनी गुनाहगारों के साथ कोठड़ी में रखा गया। यह सब पोलिस ने एक ऐसे मुकदमे के कारण किया जो देवयानी जी की नौकरानी श्रीमती संगीता रिचर्ड्स ने उन के विरुद्ध फ़रियाद की कि उन्हें अमरिकी क़ानून ने कहा उनसे कम तनख्वाह मिलती है। उस के पहले जून २ ० १ ३ में ही यह रिचर्ड्स महिला देवयानी जी के घर से गायब हो गयी थी और भाग जाते समय देवयानी जी के घर से २ मोबाइल फोन , गहने , कॅश रकम और काम का मस्टर चोरी कर ले गयी थी। देवयानी जी ने इस की फ़रियाद न्यू यॉर्क पोलिस में तभी से दे राखी थी लेकिन उन्होंने रिचर्ड्स पर कोई कारवाही नहीं की। तब देवयानी जी ने श्रीमती रिचर्ड्स के बारे में भारतीय मंत्रालय को फ़रियाद की और दिल्ली कोर्ट ने रिचर्ड्स के विरुद्ध वारंट निकाला हुआ है जिस की जानकारी भी भारत सरकार ने अमरिकी सरकार को दी थी। उस पर कारवाही करने की जगह अमरिकी सरकार ने देवयानी जी पर ही मुक़दमा डाला कि वे नौकरानी को कम (रु ३ ० ० ० ० महीना ) तनख्वाह देती है। जब कि उसी तनख्वाह के कागजों पर भारत के अमरिकी दूतावास ने रिचर्ड्स को वीसा दिया था – तभी वीसा देने से मना क्यों नहीं किया अगर अमरीका का कोई अलग तनख्वाह का नियम था ? गम्भीर घटना यह भी है कि देवयानी जी को न्यू यॉर्क के रस्ते पर उन की बेटी की शाला के सामने गिरफ्तार कर उन के सभी मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के २ ही दिन पहले किसी बड़े गुट ने श्रीमती संगीता रिचर्ड्स और उन के पति फिलिप इन के परिवार को विमान से न्यू यॉर्क पहुँचाया, उन के वकीलों से देवयानी जी को फोन करवाये कि वे बड़ी रकम रिचर्ड्स परिवार को दें , अमरीका में उन्हें कायम निवासी का दर्ज देने के लिए कागज़ बनवाये ना तो देवयानी जी को बड़े केस में फंसाएंगे और २ दिन बाद ही देवयानी जी के साथ अमरीकी सरकार ने इतना बड़ा दुर्व्यवहार किया। भारत सरकार ने अमरीकी सरकार से कहा कि इस भयंकर मानवाधिकार उल्लंघन के लिए अमरीका क्षमा मांगे। अमरीका ने यह नहीं लिया और उल्टा भारत को नियम की सूची दिखने लगी। भारत ने अमरीकी दूतावास से बेरिकेड्स हटाई, उन सभी के राजनयिक अधिकारों में कटौती की तब अमरीका ने केवल खेद जताया लेकिन माफ़ी नहीं माँगी है। मुक़दमा भी वापस नहीं लिया है। यह विषय केवल राजनयिक व्यक्ति का नहीं ; देवयानी खोब्रागडे अनुसूचित जाति से हैं , महिला है , भारत के लिए मुश्किल देशों में (पाकिस्तान आदि) काम किया है। हमारा उत्तरदायित्व है कि हम भारत के किसी भी व्यक्ति पर ऐसा अत्याचार ना सहें। इसलिए अमरीकी उत्पाटनों और सेवाओं का बहिष्कार करें : जैसे कि , कोलगेट, प्रोक्टर एंड गेम्बल का अरियल साबुन / टाइड जिलेट / विस्पर सेनिटरी नेपकिन / ओरल बी टूथपेस्ट आदि , जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी उत्पादन / स्टे फ्री नेपकिन / जख्म सिलने के धागे / बेंडेड ; मैकडोनाल्ड के बर्गर आदि ; डोमिनोस पिज़्ज़ा , कोका कोला और पेप्सी , सैम्सोनाइट बैग , आय फोन , फायझर और अबोट फार्मा की दवाइयां जैसे बेकोसुल / एरिथ्रोसिन ; अमेरिकन एक्सप्रेस बेंक , एसेंचर मेनेजमेंट सेवायें , फ़ेडेक्स और यूपीएस, वाल मार्ट , मोंसांटो के बीज , स्टार बक्स कॉफ़ी, वर्लपूल वाशिंग मशीन , जनरल मोटर्स और फोर्ड गाड़ियां , माइक्रोसॉफ्ट आदि अनेक। पूर्ण सूची के लिए इस के बाद की पोस्ट देखें। अमरीका भारत के साथ दादागिरी कर रही है। देरी से ही सही अब भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अब सभी भारतीयों ने एक होकर अमरीका के कंपनियों को भारत से पैसा कमाने नहीं देना चाहिए। वे हमारी बेटियों को ज़लील करें और हम उन के उत्पादन उपयोग कर उन्हें मोटी कमाई करने दें यह हो ठीक नहीं। अमरीकी कंपनियों , अब भारत छोडो !

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गहरी नींद के आसान उपाय***
* रात्रि भोजन करने के बाद पन्द्रह से बीस मिनट धीमी चाल से सैर कर लेने के बाद ही बिस्तर पर जाने की आदत बना लेनी चाहिए। इससे अच्छी नींद के अलावा पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है।
* अगर तनाव की वजह से नींद नहीं आ रही हो या फिर मन में घबराहट सी हो तब अपना मन पसंद संगीत सुनें या फिर अच्छा साहित्य या स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तकें पढ़ें, ऐसा करने से मन में शांति का भाव आएगा, जो गहरी नींद में काफी सहायक होता है।
* अनिद्रा के रोगी को अपने हाथ-पैर मुँह स्वच्छ जल से धोकर बिस्तर पर जाना जाहिए। इससे नींद आने में कठिनाई नहीं होगी। एक खास बात यह कि बाजार में मिलने वाले सुगंधित तेलों का प्रयोग नींद लाने के लिए नहीं करें, नहीं तो यह आपकी आदत में शामिल हो जाएगा।
* सोते समय दिनभर का घटनाक्रम भूल जाएँ। अगले दिन के कार्यक्रम के बारे में भी कुछ न सोचें। सारी बातें सुबह तक के लिए छोड़ दें। दिनचर्या के बारे में सोचने से मस्तिष्क में तनाव भर जाता है, जिस कारण नींद नहीं आती।
* अपना पलंग मन-मुताबिक ही चुनें और जिस मुद्रा में आपको सोने में आराम महसूस होता हो, उसी मुद्रा में पहले सोने की कोशिश करें। अनचाही मुद्रा में सोने से शरीर की थकावट बनी रहती है, जो नींद में बाधा उत्पन्न करती है।
* अगर अनिद्रा की समस्या पुरानी और गंभीर है, नींद की गोलियाँ खाने की आदत बनी हुई है तो किसी योग चिकित्सक की सलाह लेकर शवासन का अभ्यास करें और रात को सोते वक्त शवासन करें। इससे पूरे शरीर की माँसपेशियों का तनाव निकल जाता है और मस्तिष्क को आराम मिलता है, जिस कारण आसानी से नींद आ जाती है।
* अच्छी नींद के लिए कमरे का हवादार होना भी जरूरी है। अगर मौसम बाहर सोने के अनुकूल है तो छत पर या बाहर सोने को प्राथमिकता दें। कमरे में कूलर-पँखा या फिर एयर कंडीशनर का शोर ज्यादा रहता है, तो इनकी भी मरम्मत करवा लेनी चाहिए, क्योंकि शोर से मस्तिष्क उत्तेजित रहता है, जिस कारण निद्रा में बाधा पड़ जाती है।

* सोने से पहले चाय-कॉफी या अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करें। इससे मस्तिष्क की शिराएँ उत्तेजित हो जाती हैं, जो कि गहरी नींद आने में बाधक होती हैं।

 

 

 

 

भारत और विश्व में आलू विख्यात है और अधिक उपजाया जाता है. यह अन्य सब्जियों के मुकाबले सस्ता मिलता लेकिन गुणों से भरपूर . आलू से मोटापा नहीं बढ़ता. आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है. आलू को उबालकर अथवा गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभदायक और निरापद है.
आलू में विटामिन बहुत होता है. आलू को छिलके सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है. इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर खाएं। इसको मीठे दूध में भी मिलाकर पिला सकते हैं.
आलुओं में प्रोटीन होता है, सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है. आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है.
आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है. आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं.
यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं.
आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि अच्छी तरफ साफ़ किये छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है. जिस पानी में आलू उबाले गए हों, वह पानी न फेंकें, बल्कि इसी पानी से आलुओं का रस बना लें. इस पानी में मिनरल और विटामिन बहुत होते हैं.
आलू पीसकर, दबाकर, रस निकालकर एक चम्मच की एक खुराक के हिसाब से चार बार नित्य पिएं, बच्चों को भी पिलाएं, ये कई बीमारियों से बचाता है. कच्चे आलू को चबाकर रस को निगलने से भी बहुत लाभ मिलता है.
कुछ अन्य:
– कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ.
– शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।.
-भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है. आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है.
-चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएं। इससे गठिया ठीक हो जाता है.
-गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है. पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं.
-उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है.
-आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा.
– कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है.