Dr. PravinBhai Togadia
हिन्दू न्यूज नेटवर्क: अमरीका – भारत छोडो ! विश्व हिन्दू परिषद् का अमरीकी उत्पादनों और सेवाओं का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रीति से बहिष्कार करने का आवाहन। अमरिका : भारत छोडो! अमरिकी उत्पादनों का बहिष्कार ! यह पोस्ट पूर्ण पढ़ें : भारत की कन्या देवयानी खोब्रागडे (जो अमरिका में भारत की राजनयिक भी है ) वे अपनी छोटी बच्ची को शाला में छोड़ने गयी थी तब उन्हें न्यू यॉर्क की कड़ाके की ठण्ड में पोलिस ने गिरफ्तार किया , उन के कपडे उतरवाए और उन के शरीर को अनेक जगह स्पर्श कर उन की तलाशी ली गयी। उन्हें नशेड़ियों और खुनी गुनाहगारों के साथ कोठड़ी में रखा गया। यह सब पोलिस ने एक ऐसे मुकदमे के कारण किया जो देवयानी जी की नौकरानी श्रीमती संगीता रिचर्ड्स ने उन के विरुद्ध फ़रियाद की कि उन्हें अमरिकी क़ानून ने कहा उनसे कम तनख्वाह मिलती है। उस के पहले जून २ ० १ ३ में ही यह रिचर्ड्स महिला देवयानी जी के घर से गायब हो गयी थी और भाग जाते समय देवयानी जी के घर से २ मोबाइल फोन , गहने , कॅश रकम और काम का मस्टर चोरी कर ले गयी थी। देवयानी जी ने इस की फ़रियाद न्यू यॉर्क पोलिस में तभी से दे राखी थी लेकिन उन्होंने रिचर्ड्स पर कोई कारवाही नहीं की। तब देवयानी जी ने श्रीमती रिचर्ड्स के बारे में भारतीय मंत्रालय को फ़रियाद की और दिल्ली कोर्ट ने रिचर्ड्स के विरुद्ध वारंट निकाला हुआ है जिस की जानकारी भी भारत सरकार ने अमरिकी सरकार को दी थी। उस पर कारवाही करने की जगह अमरिकी सरकार ने देवयानी जी पर ही मुक़दमा डाला कि वे नौकरानी को कम (रु ३ ० ० ० ० महीना ) तनख्वाह देती है। जब कि उसी तनख्वाह के कागजों पर भारत के अमरिकी दूतावास ने रिचर्ड्स को वीसा दिया था – तभी वीसा देने से मना क्यों नहीं किया अगर अमरीका का कोई अलग तनख्वाह का नियम था ? गम्भीर घटना यह भी है कि देवयानी जी को न्यू यॉर्क के रस्ते पर उन की बेटी की शाला के सामने गिरफ्तार कर उन के सभी मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के २ ही दिन पहले किसी बड़े गुट ने श्रीमती संगीता रिचर्ड्स और उन के पति फिलिप इन के परिवार को विमान से न्यू यॉर्क पहुँचाया, उन के वकीलों से देवयानी जी को फोन करवाये कि वे बड़ी रकम रिचर्ड्स परिवार को दें , अमरीका में उन्हें कायम निवासी का दर्ज देने के लिए कागज़ बनवाये ना तो देवयानी जी को बड़े केस में फंसाएंगे और २ दिन बाद ही देवयानी जी के साथ अमरीकी सरकार ने इतना बड़ा दुर्व्यवहार किया। भारत सरकार ने अमरीकी सरकार से कहा कि इस भयंकर मानवाधिकार उल्लंघन के लिए अमरीका क्षमा मांगे। अमरीका ने यह नहीं लिया और उल्टा भारत को नियम की सूची दिखने लगी। भारत ने अमरीकी दूतावास से बेरिकेड्स हटाई, उन सभी के राजनयिक अधिकारों में कटौती की तब अमरीका ने केवल खेद जताया लेकिन माफ़ी नहीं माँगी है। मुक़दमा भी वापस नहीं लिया है। यह विषय केवल राजनयिक व्यक्ति का नहीं ; देवयानी खोब्रागडे अनुसूचित जाति से हैं , महिला है , भारत के लिए मुश्किल देशों में (पाकिस्तान आदि) काम किया है। हमारा उत्तरदायित्व है कि हम भारत के किसी भी व्यक्ति पर ऐसा अत्याचार ना सहें। इसलिए अमरीकी उत्पाटनों और सेवाओं का बहिष्कार करें : जैसे कि , कोलगेट, प्रोक्टर एंड गेम्बल का अरियल साबुन / टाइड जिलेट / विस्पर सेनिटरी नेपकिन / ओरल बी टूथपेस्ट आदि , जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी उत्पादन / स्टे फ्री नेपकिन / जख्म सिलने के धागे / बेंडेड ; मैकडोनाल्ड के बर्गर आदि ; डोमिनोस पिज़्ज़ा , कोका कोला और पेप्सी , सैम्सोनाइट बैग , आय फोन , फायझर और अबोट फार्मा की दवाइयां जैसे बेकोसुल / एरिथ्रोसिन ; अमेरिकन एक्सप्रेस बेंक , एसेंचर मेनेजमेंट सेवायें , फ़ेडेक्स और यूपीएस, वाल मार्ट , मोंसांटो के बीज , स्टार बक्स कॉफ़ी, वर्लपूल वाशिंग मशीन , जनरल मोटर्स और फोर्ड गाड़ियां , माइक्रोसॉफ्ट आदि अनेक। पूर्ण सूची के लिए इस के बाद की पोस्ट देखें। अमरीका भारत के साथ दादागिरी कर रही है। देरी से ही सही अब भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अब सभी भारतीयों ने एक होकर अमरीका के कंपनियों को भारत से पैसा कमाने नहीं देना चाहिए। वे हमारी बेटियों को ज़लील करें और हम उन के उत्पादन उपयोग कर उन्हें मोटी कमाई करने दें यह हो ठीक नहीं। अमरीकी कंपनियों , अब भारत छोडो !
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Posted on December 21, 2013, in Uncategorized. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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